December 13, 2018

पुरातन इलाज

gharelu purtan

अनेक बार रोगी उपचार हेतु एलोपैथिक चिकित्सक के पास जाता है | एलोपैथिक उपचार करवाने पर भी जब उसे स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं दिखता है तब वह आयुर्वेदिक उपचार की ओर मुड़ता है | जब तक वह आयुर्वेदिक उपचार की ओर मुड़ता है रोग उसके शरीर में घर कर चुका होता है | उन औषधियों पर अत्यधिक धन व्यय हो चुका होता है | साथ ही उसे उन औषधियों के दुष्प्रभाव भी झेलने पढ़ते हैं | आयुर्वेदिक उपचार करवाने के उपरांत रोगी को रोग ठीक होने का एहसास होने लगता है तब वह यह विचार करने लगता है कि अच्छा होता यदि मैं आरंभ से ही आयुर्वेदिक उपचार करवाता | इसलिए ऐसा ना हो तथा हानिकारक दुष्प्रभाव से बचने के लिए रोग के आरंभ में हैं आयुर्वेदिक उपचार करवाना आवश्यक है |