November 13, 2018

0 से 12 माह तक कैसा होना चाहिए आपके शिशु का डाइट प्लान

0 से 12 माह तक कैसा होना चाहिए आपके शिशु का डाइट प्लान  

             उचित आहार और सही देखभाल से ही बच्चे की ग्रोथ अच्छी होती है। इसलिए शिशु के खान-पान का उचित ख्याल रखना उसकी मां का पहला कार्य होता है। यदि शिशु का पालन पोषण अच्छी तरह से नहीं होगा तो वह जीवन भर बीमारियों और परेशानियों का सामना करता रहेगा। शिशु को आहार उसकी उम्र के हिसाब से देना चाहिए इसलिए शिशु की माता को ये पता होना चाहिए की कौन से आहार कब देना है और कौन सा कब नहीं देना। आहार की उचित जानकारी शिशु की माता को पता होनी चाहिए।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताना चाह रहे हैं कि जीरो से 12 माह तक के बच्चे का डाइट प्लान क्या होना चाहिए|

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0-3 महीने के शिशु के लिए आहार

               नवजात बच्चे के लिए मां का दूध सबसे अच्छा खाना होता है मां का दूध शुद्ध, मिलावट रहित और सभी पोषक तत्वों से भरपूर होता है|मां के दूध का सही मात्रा में सेवन करवाने से बच्चा हष्ट पुष्ट और स्वस्थ रहता है|मां का दूध पीने से बच्चे और मां के बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन जाता है|मां का दूध बच्चे को बाहरी संक्रमण से बचा कर रखता है वहां के दूध में इम्यूनोग्लोबिन (सुरक्षात्मक प्रोटीन) मिला होता है|कुछ मां  बच्चों को उबला पानी, फ्रूट जूस और ग्लूकोस पानी भी देती है|जिसकी कि बच्चे को जरूरत नहीं होती है शुरू के 3 माह बच्चे को मां का दूध ही देना चाहिए मां का दूध बच्चे के शरीर से बीमारियां और एलर्जी को दूर भगाता है जो बच्चा मां का दूध नियमित रूप से पीता है उसे अस्थमा जैसे गंभीर रोग होने का चांस बहुत कम होता है|

             नवजात के जन्म लेने के बाद शुरू के 3 महीने में मां का भोजन भी बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है|इसलिए डिलीवरी के बाद महिला को अपनी डाइट का और अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए अपनी डाइट को बैलेंस रखना चाहिए|शुरुआत के 3 महीने बच्चे को आयरन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है अगर मां को स्तनों में दूध सही तरीके से नहीं आता है या कोई समस्या है तो वह बॉडी में आयरन की कमी को दर्शाता है इसलिए मां को अपने डाइट को बैलेंस करके रखना चाहिए|3 महीने के बाद अन्य भोजन भी देना शुरु किया जा सकता है जो कि आयरन से भरपूर हो

3-6 महीने के शिशु का आहार

                 3 से 6 माह में शिशु के शरीर को पोषक तत्वों की भरपूर आवश्यकता होती है इस दौर में शिशु का आहार मां के दूध पर निर्भर ना रहकर कुछ ठोस आहार में भी परिवर्तित हो जाता है जैसे पका हुआ भोजन|पके हुए भोजन की शुरूआत सेरेलेक देकर भी की जा सकती है जिसे अच्छी तरह से मेश करके थोड़े थोड़े अंतराल पर बच्चे को देना चाहिए इससे बच्चे के शरीर के लिए पर्याप्त पोषक तत्व मिलेंगे|धीरे-धीरे बच्चे को दोपहर में भी कुछ नया देने का प्रयास करें जिसे कि बच्चा आसानी से हजम कर सके|बच्चे को दिए जाने वाले भोजन को एकदम से ना बढ़ाकर धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए जब आप बच्चे को कुछ नया भोजन देने की शुरुआत करें तो कम से कम 1 सप्ताह तक देना चाहिए और उसके 2 सप्ताह तक खिलाने के बाद ही कुछ और नया देना चाहिए|

                बच्चे को भोजन कभी भी बोतल से ना दें चम्मच से खिलाने की आदत डालें जिससे कि बच्चे को बाद में ठोस आहार लेने पर दस्त होने की समस्या ना हो|जब थोड़ा बड़ा हो जाए तो उसे दही और अच्छी तरह से पके हुए चावल खिला सकते हैं| जब बच्चा भोजन को अच्छी तरह से पचाने लगे तब उसे खिचड़ी खिलाना उचित रहेगा|खिचड़ी को चावल और मूंग की दाल के साथ बनाया जाना चाहिए|इस उम्र में सूप और पचने वाली सब्जियां, फल दिन में एक आध बार देना चाहिए|मां के दूध की पर्याप्त मात्रा ना मिल पाने के कारण बच्चे के शरीर में जो आयरन की कमी होती है वह फल और सब्जियों के सेवन से आयरन की कमी दूर हो जाती है| बच्चों को दिए जाने वाले फल पूरी तरह से पके होने चाहिए| अगर बच्चों का खानपान का अच्छी तरह से ध्यान रखा जाए तो उसके जन्म से 5 महीने में ही उसका वजन 2 गुना हो सकता है |

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6-8 महीने के बच्‍चे के लिए आहार

                  6 महीने के बाद बच्चे ठोस आहार लेना पसंद करते हैं बच्चों को इस समय तक फल-सब्जियां देना शुरू कर देना चाहिए 6 महीने के होने के बाद बच्चे नटखट होने लग जाते हैं वह अपने हाथ से ही खाना खाना पसंद करते हैं इसके लिए बच्चों को खाना खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए 6 महीने के होने के बाद बच्चों के दांत भी निकलना शुरू होते हैं जिससे से उनके दातों में इरिटेशन होता है इरिटेशन के कारण वह कुछ भी चीज उठा कर अपने मुंह में डाल लेते हैं और उसे मुंह में ही बनाए रखते हैं इस कारण से उन्हें दस्त होने की संभावनाएं भी रहती है इस आदत को छुड़ाने के लिए या कम करने के लिए एक बिस्किट या टोस्ट दे देना चाहिए जिससे वह चूसता रहे और चबा ना पाए|बच्चों को उबला हुआ आलू देना चाहिए अगर चाहे तो उसमें थोड़ा सा नमक और नींबू की 123 कर रस में छोड़ दें उसके अलावा अन्य सब्जियां जैसे गाजर, कद्दू, गोभी, पालक को भी अच्छे से उबालकर पीसकर नमक डालकर बच्चों को खिलाना चाहिए बच्चों को मिल्क में इडली, ढोकला, चपाती पीसकर दे सकते हैं इस उम्र में बच्चे को अंडा भी देना शुरू कर देना चाहिए| सप्ताह में तीन से चार अंडे खिलाना बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा|

9-10 महीने के बच्‍चे के लिए आहार

                   बच्चा जब 9 से 10 महीने का हो जाए तो उसे आप फिश, चिकन और मीट भी खिला सकते हैं लेकिन इसे अच्छी तरह से पका हुआ और सॉफ्ट होना चाहिए हड्डी वाला हिस्सा बच्चे को भूलकर भी ना दें| जब तक बच्चा प्रतिदिन 500 मिलीलीटर दूध पीता रहता है तब तक उसे शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है|

11-12 महीने के बच्‍चे का आहार

             जब बच्चा 1 साल का हो जाता है तो उसका वजन जन्म के समय से 3 गुना हो जाता है बढ़ते बच्चों को समय समय पर मिल्क, फ्रूट जूस, बिस्किट आदि देना चाहिए| एक मिश्रित संतुलित भोजन बच्चे के शरीर में होने वाली कमियों को दूर करता है और उन्हें कई तरह के रोगों से बचाता है|

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