November 13, 2018

मैमोग्राफी क्या है,What is the Mammography

मैमोग्राफी for Gharelu paramarsh

मैमोग्राफी क्या है,What is the mammography 

        स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाली आम व गंभीर समस्या है | सही समय पर इसका इलाज नहीं होने पर या खतरनाक हो सकती है | स्तनों के एक्सरे की प्रक्रिया को मेमोग्राफी कहते हैं | मेमोग्राफी एक ऐसी तकनीक है जिससे महिलाओं के स्तनों में होने वाले ट्यूमर का पता लगाया जाता है |

        मेमोग्राफी एक्स-रे की एक प्रक्रिया है जो कि स्तन के कोमल टिश्यू के चित्र को दिखाता है | यह एक महंगी स्क्रीनिंग प्रक्रिया है जिससे स्तन के कैंसर की पहचान आसानी से हो सकती है | यह एक्सरे, गांठ महसूस होने से 2 वर्षों तक किया जा सकता है |

मेमोग्राफी क्या है-

मैमोग्राफी for gharelu paramarsh

     स्तनों के टिशूज में असामान्य वृद्धि या परिवर्तन होने पर उसकी पहचान करने के लिए विशेष प्रकार की एक्सरे प्रक्रिया को मेमोग्राफी कहा जाता है | इसमें एक मशीन और स्तन टिशू के लिए निर्मित एक्सरे फिल्म का प्रयोग किया जाता है | इस प्रक्रिया में एक टेक्नीशियन स्तन को दबाकर कम से कम दो एंगल से उसके चित्र लेता है | दोनों स्तनों के अलग-अलग चित्र के सेट बनाए जाते हैं | इस सेट को मैमोग्राम और इस प्रक्रिया को मैमोग्राफी कहते हैं | मैमोग्राम की स्क्रीनिंग प्रक्रिया में स्तन को ऊपर से नीचे और बाजू से बाजू तक एक्सरे लिया जाता है |

     पहले स्तन कैंसर की समस्या उम्रदराज महिलाओं में होती थी किंतु आजकल कम उम्र की महिलाओं में भी स्तन कैंसर की समस्या तेजी से बढ़ रही है | 40 वर्ष की उम्र के बाद सभी महिलाओं को प्रतिवर्ष मैमोग्राम करने की सलाह दी जाती है |

     सभी महिलाओं को 40 साल की उम्र में मेमोग्राफी के साथ नियमित स्क्रीनिंग शुरू करनी चाहिए | और यदि आपके परिवार में पहले से ही किसी को स्तन कैंसर रहा है तो आप को समय-समय पर मैमोग्राम कराते रहना चाहिए |

मेमोग्राफी की आवश्यकता-

    यह जरूरी नहीं है कि मेमोग्राफी केवल वही महिलाएं करवाएं जो ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही है या फिर जिनको ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका है | यह एक सामान्य जांच का हिस्सा होता है | यह किसी प्रकार के स्तन की असामान्यता की जांच करने की एक प्रक्रिया है |

    यदि स्तनों में कोई समस्या है जैसे  सूजन या गांठ है या स्तनों में असामान्य बदलाव महसूस कर रही हैं तो चिकित्सक समस्या को सुनिश्चित करने के लिए मैमोग्राफी की सलाह देते हैं | प्रारंभिक अवस्था में अत्यंत छोटी गठान का एहसास नहीं होता है | जबकि मैमोग्राम द्वारा इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है |

    मेमोग्राफी प्रक्रिया का उद्देश्य स्तन कैंसर का पता लगाना है | समय पर स्तन कैंसर का पता लगने से स्तन कैंसर होने से बचा जा सकता है और प्रारंभिक स्थिति में कैंसर के इलाज में पूरे स्तन को निकालने की जरूरत नहीं पड़ती है | इस अवस्था में पता लगने के बाद स्तन कैंसर के रोगियों का 90 से 95% तक सफल इलाज हो सकता है | जब स्तन कैंसर का बाद की अवस्था में पता चलता है तो इस के इलाज के लिए पूरे स्तन को ऑपरेशन के जरिए निकालना पड़ता है |

 

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