November 13, 2018

बच्चो को होने वाली आम बीमारिया और उनके इलाज –

बच्चो को होने वाली आम बीमारिया और उनके इलाज –

           बच्चे के जन्म के साथ ही शुरू हो जाता है उसकी तकलीफो का सिलसिला | बच्चे और बीमारिया। ….. ऐसा लगता हे मनो चोली -दामन का साथ हो |ऐसे में हर माँ को कुछ बातो का ज्ञान अवश्य होना चाहिए ,जिससे वह सही समय पर अपने बच्चे की बीमारी का सही इलाज कर सके | यूं  तो शरीर में बीमारी आना बड़ी स्वाभाविक प्रक्रिया हे,लेकिन जब बात बच्चो की आती है तो अधिक सावधानी बरतने की जरुरत होती हे |

किस तरह बच्चे की बीमारी या उनकी तकलीफ को समझा जाये और कैसे उसका इलाज किया जाये ,इस बारे मे आज हम आपको इस लेख क द्वारा बताएंगे | 

बुखार आना –

बुखार का अर्थ हे की प्रकृति शरीर क विजातीय दूषित पदार्थो को जलाकर रख करने की कोशिश कर रही है | बुखार हमारे शरीर को निरोग रखने के  लिए आता हे | जब भी शरीर में कोई गतिविधि होती हे और खून में स्थित सफ़ेद जीवाणु  उसका पूरा मुकाबला नहीं कर पाते तो शरीर का तापमान बढ़ जाता है  यह भी एक तरीका हे रोग से लड़ने का |

बुखार आने पर घबराना नहीं चाहिए ,क्युकी सामान्यतः बुखार दो या तीन दिन में ठीक हो जाता हे ,लेकिन यदि बुखार इससे ज्यादा दिन तक रहता हे तो इंफेक्शन की सम्भावना हो सकती हे ऐसे में ब्लड टेस्ट करवा लेना चाहिए |

उपचार –

अक्सरदेखने आता है की बुखार आते ही माताएं  बच्चो को ज्यादा कपडे पहना देती है ,क्योकि बुखार के साथ जुकाम भी जुड़ा रहता है | बच्चो को ठण्ड न लग जाये ,इस दर से वे उन्हें कपड़ो से लाड देती है | ऐसे में बच्चो को सामान्य कपडे पहनने चाहिए , विशेषकर सूती वस्त्र | ऊनि कपडे पहनने से तो शरीर का तापमान और भी बढ़ेगा |

. ज्यादा बुखार हो तो बच्चो को स्पंज करे ,यदि हो सके तो नहलाने से भी न हिचके |

.कमरे के खिड़की -दरवाजे खुले रखे ,जिससे शुद्ध हवा का आवागमन जारी रहे |

.बच्चे को बार-बार पानी पिलाते रहे ,निम्बू पानी व फलो का जूस देते रहे |

.अपनी मर्जी से बच्चे को कोई भी दवाई न दें | दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से ही बच्चे को दी जनि चाहिए |

.बच्चे का सिर सामान्य तौर  पर थोड़ा गर्म होता ही है ,इसलिए सिर को छू कर बुखार का अंदाजा न लगाए |

. बुखार  थोड़े से दूध में ३ -५ काली लहसुन की उबालकर उस दूध से उसक हाथ -पाँव में हलकी सी मालिश करने से उसका बुखार उतर जाता है |

डायरिया-

बच्चो में डायरिया या वमन की शुरुआत होते ही पानी ज्यादा से ज्यादा पिलाना चाहिए | यह पानी अच्छी तरह से उबाल कर  ठंडा किया हुआ होना चाहिए | मुख्य बात यह है की बच्चे के शरीर में तरल पदार्थो की मात्रा कम नहीं होनी चाहिए  इसलिए उसे थोड़ी – थोड़ी देर में पानी पिलाते रहना चाहिए  आप पानी के आलावा छाछ ,निम्बू पानी आदि भी दे सकते है  | 

डायरिया के लक्षण –

चिड़चिड़ापन ,बहुत ज्यादा प्यास लगना ,पेट में मरोड़ होना ,दस्त लगना ,पेशाब कम- आना ,और  बच्चे की आँखे सिकुड़ जाती है और आँशु भी कम बनते है ,हाथ -पैर  भी ठन्डे होने लगते है | 

सावधानिया –

बच्चे को जब पतला दस्त पानी की अधिक मात्रा के साथ आये तो बच्चे की पानी की मात्रा बड़ा देनी चाहिए मतलब दुगुनी कर देनी चाहिए और यदि दस्त के साथ उल्टिया भी आये तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए | 

डायरिया होने पर बच्चे को नमक और शक्कर का घोल बना कर पिलाना चाहिए | आप ओ.आर. एस.का घोल भी पिलाना न भूले | 

बच्चो को बाहर  का बना हुआ फलो का रस  देने से बचे और बाहर का कोई भी आइटम न दे | एक बात का विशेष ध्यान रखे की डायरिया होने पर बच्चो को ग्लूकोज़ ,और कोई कोल्ड्रिंक न पिलाये इससे दस्त और ज्यादा बढ़  जायेंगे | 

आप अपने बच्चे को स्तनपान करवाती  रहे  इससे बच्चे को एनर्जी मिलती रहेगी | 

आप बच्चे को नारियल पानी दे सकती है पर ध्यान रहे वो तजा हो | 

सर्दी और खांसी –

सर्दी और खांसी एक आम बिमारी है ,जो बच्चो को सबसे ज्यादा होती है | सर्दी और खांसी में जब नाक और गले से कफ निकलता है तो आप  घबराये नहीं | इससे शिशु के शरीर की सफाई प्राकृतिक रूप से हो जाती है |  कुछ बच्चे पानी में बहुत अधिक खेलते है उससे भी सर्दी ज्यादा होती है या खान पान में ठन्डे का  ज्यादा उपयोग  होने से भी बच्चा बार-बार सर्दी खांसी की चपेट में आ जाता है | 

सर्दी और खांसीके लक्षण –

जब बच्चे को सांस लेने में तकलीफ या  सांस की गति तेज़  हो या खाने पिने में तकलीफ हो तो आप घबराये नहीं यह सर्दी खांसी के सामान्य लक्षण है और अमूमन सर्दी के साथ में बच्चे को बुखार भी हो जाता है | 

उपचार –

सर्दी खांसी को थोड़ी बहुत घरेलु दवाओं जैसे -शहद ,तुलसी ,हल्दी अदरक आदि ठीक किया जा सकता है  इन सब दवाओं से ७ दिन के अंदर सर्दी खांसी ठीक हो जाती  है | सर्दी से बच्चे की नाक बंद हो जाती है ,जिससे बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होती है | ऐसे में नाक में नमक का घोल डालने से बंद नाक खुल जाती है  लेकिन आप यह प्रयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले, बंद नाक खोलने क लिए बाजार में कई प्रकार क ड्राप उपलब्ध है  आपउनका प्रयोग भी कर सकती है | 

बच्चे को ठन्डे आहार देने से बचे गरम और सुपाच्य आहार दे जैसे -पालक ,टमाटर का सूप ,गुनगुना निम्बू पानी ,शहद ,दलिया ,लौकी , मैथी की सब्जी आदि | 

 पेटदर्द –

शिशु के रोने का  अक्सर कारण  पेटदर्द ही होता है | दर्द के समय जैसे -जैसे मरोड़ उठती है बच्चा उतना तेज रोने लगता है | इसका कारण है अधिक दूध पी लेना ,दूध के साथ वायु का प्रवेश , माँ का अधिक आहार लेना या खूब ठंडा ,बासी या गरिष्ट आहार लेना ,बिना चबाये खाना आदि | 

उपचार –

बच्चे को कंधे से लगाकर पीठ पर थपथपाने से डकार आ जाती है और कुछ ही समय में दर्द गायब हो जाता है | यदि बच्चे का पेट दर्द ठीक न हो तो पेट पर खाने का तेल लगाकर उसके  उप्पर हींग का पानी लगाए इससे बच्चे की गैस पास हो जाएगी और मरोड़ बंद   जाएगी | 

कब्ज –

यदि बच्चा नियमित शौच न करता हो या मल त्याग करते समय रोता हो और मल  बहुत सूखा होता है तो उसे कब्ज की शिकायत  है | कब्ज का कारण है पर्याप्त मात्रा माँ पानी न पीना,मैदे या बेसन से बानी चीजे खाना | 

उपचार

कब्ज की शिकायत होते ही बच्चे को गुनगुने पानी का एनिमा  दे इससे आंतो में रुका हुआ मल तुरंत निकल आएगा | बच्चे की उम्र  देखकर पानी की मात्रा निर्धारित करे | बच्चे को तीन दिन तक फलो का सेवन करवाए  | फलो में सेब ,अमरुद ,गाजर ,पपीता ,संतरा ,अन्नानास और अनार सबसे उत्तम रहेंगे |

 

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