November 13, 2018

नई माताओं के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव

नई माताओं के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव

नई माताओं के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव

                इस पोस्ट के माध्यम से हम नई माताओं के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव देने जा रहे हैं अगर आपको स्वभाविक रुप से स्तनपान कराने में कुछ कठिनाई हो रही है तो चिंता ना करें बहुत सी नई माताओं को स्तनपान कराने में माहिर होने के लिए अभ्यास और द्रढ़ता की जरूरत पड़ती है |

           रात में लेटे लेटे मां शिशु को दूध पिलाती है दूध पिलाते-पिलाते वह सो जाती है मां का स्तन शिशु के मुंह को ढक देता है जिससे नाक भी ढक जाती है शिशु में वह ताकत नहीं है कि वह अपने मुंह को स्तन से बाहर निकाल  सके इसलिए दम घुट कर वह मर जाता है | मां जब जागती है तो वह देखती है कि शिशु मर चुका है अतः रात में बिस्तर पर लेटे-लेटे नन्हें बच्चों को दूध ना पिलाए |

       रात में ही क्यों किसी भी समय शिशु को लेट कर दूध ना पिलाए | चाहे वह छोटा हो या बड़ा | क्योंकि गले में  फेरींगस के मोड़ पर नाक, कान, मुंह, ग्रास नली तथा श्वास नली का छिद्र है | अर्थात गले में दो छिद्र नाक के, दो कान के, एक मुंह का, एक ग्रासनलिका तथा एक श्वास नली का छिद्र है | शिशु को लिटा कर दूध पिलाने से कभी-कभी दूध कान के छेद में चला जाता है वह दूध कान की नली में संक्रमण पैदा कर देता है जिसके फलस्वरुप कान बहने लगता है | अतः हर मां को चाहिए कि वह शिशु को लिटा कर दूध ना पिलाए|

       बहुत सी माताएं नवजात शिशु को लेकर हॉस्पिटल में आती है और कहती है इसके मुंह में छाला पड़ गया है दूध नहीं पी पाता | होता यह है कि मां जब दूध पिलाती है तो दूध पिलाने के समय दूध का कुछ अंश ब्लाउज में लग जाता है | ऐसा भी पाया जाता है कि जब मां दूध पिलाती है तो दूध पिलाते समय एक स्तन से दूध पिलाते समय दूसरे स्थान से दूध अपने आप टपकने लगता है जो पहने हुए कपड़े में लगकर सूख जाता है | ब्लाउज में लगे दूध के सड़ने से फंगस पैदा हो जाता है जो स्तन के आगे के हिस्से पर लगा रहता है शिशु जब दूध पीता है तो उसके मुंह में फंगल संक्रमण हो जाता है जो मुंह में छाले का कारण बनता है  | इसलिए मेरी तीसरी चेतावनी है कि मां जब भी दूध पिलाएं स्तन को गर्म पानी से धोकर साफ करें | हर बार पानी गर्म करना संभव नहीं हो तो डिटॉल के पानी से धोकर पिलाएं |

स्तनपान शिशु के लिए वरदान :-

        आज के युग में सौभाग्यशाली शिशु ही माता का दूध पी सकते हैं | वर्तमान परिस्थितियों में घर परिवार कैरियर के चक्कर में नारी अपने ही शिशु को इस अमृततुल्य वरदान से वंचित कर रही है | महिला को अपने फिगर बढ़ने का भय बना रहता है, वहीं कुछ महिलाएं व्यस्तता  के कारण अपने ही शिशु को स्तनपान नहीं करा पाती है | बल्कि सच तो यह है कि मां के दूध में ही वे सभी तत्व पाए जाते हैं जो बच्चे के पूर्ण विकास के लिए आवश्यक है | वैज्ञानिकों का दावा है कि डिलीवरी के तुरंत बाद स्तन के निप्पल से निकलने वाला पीला द्रव शिशु के लिए बहुत ही लाभकारी है| इस पीले द्रव्य में पर्याप्त मात्रा में एंटीबायोटिक पाए जाते हैं |  विशेषत: इम्युनोग्लोबुलिन नामक तत्व  पाया जाता है | जिससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है | मां के दूध को ही शिशु के लिए सबसे सर्वोत्तम आहार माना जाता है| मनोवैज्ञानिक रूप से भी स्तनपान एक ऐसी क्रिया है जिससे शिशु के भावी जीवन व व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास होता है प्रकृति ने स्वयं मां के दूध को वसा, प्रोटीन, खनिज, लवण, चीनी व पानी से युक्त बनाया है | स्तनपान करने वाले शिशु अनेक संक्रमण रोगों से बचे रहते हैं |

दुग्धपान कैसे कराएं:-

       कोशिश करें कि जन्म के 1 घंटे के अंदर ही शिशु को मां के स्तन से लगा दें | यह एक ऐसे मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो जो प्रसूता मां की पीड़ा को कम कर देती हैं | जब शिशु स्तन के आगे के भाग को चूसना आरंभ करता है तो गर्भाशय भी सिकुड़ने लगता है दूध पिलाते समय मां और शिशु की स्थिति आरामदेह होनी चाहिए | शिशु का सिर उसके पेट से थोड़ा ऊंचा रहे | निप्पल का बहुत सा हिस्सा मुंह के अंदर होना चाहिए, नहीं तो उसे चूसने पर भी दूध नहीं मिलेगा |  दुग्धपान करने से पहले स्तनों को साफ अवश्य करें | नवजात को बारी-बारी से दोनों स्तनों से दूध पिलाएं | स्तन को एक हाथ से संभाले रहें ताकि बच्चे को सांस लेने में कठिनाई ना हो |

दिन में कितनी बार दूध पिलाएं:-

       शिशु शुरुआती दिनों में शिशु थोड़ा-थोड़ा दूध ही पी पाता है अतः उसे जल्दी-जल्दी अंतराल पर दूध पिलाएं | दूध की मात्रा भी बढ़ेगी | डेढ़ से 2 घंटे के अंतराल में शिशु को दूध पिलाना चाहिए| जब शिशु बड़ा होगा तो वह स्वयं ही दूध पीने का समय तय कर लेगा उसके लिए आपको घड़ी देखने की जरूरत नहीं | बच्चे को कभी भी जबरन स्तनपान ना कराएं ,नई माताओं के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव|

यदि नवजात स्तनपान में असमर्थ हो:-

     यदि शिशु किसी कारणवश मां का दूध नहीं पा रहा हो तो उसे स्तन से निकाला गया दूध चम्मच की सहायता से दे | ऐसी स्थिति में यदि उसे बोतल से दूध दिया जाए तो वह बाद में स्तनपान नहीं करना चाहेगा |

स्तन से दूध निकालने की विधि :-

      उपरोक्त बताइए कारणों में से किसी भी कारण से स्तन से दूध निकालने की आवश्यकता पड़ सकती है|  गर्म पानी से सिकाई करने के पश्चात हाथों को अच्छी तरह से धो कर सुखा लें | स्तन को साफ कपडे से पोंछ लें | दोनों हाथों से छाती से निप्पल की ओर मालिश करें | मालिश के बाद अंगूठे व अंगुली की सहायता से निप्पल के बहरी किनारे दबा कर दूध निकाले | इस प्रकार निकले गए दूध को उबालने की चेस्टा न करे | इस निकले गए दूध को फ्रीज़ में स्टोर किया जा सकता है | कामकाजी महिलाओ के लिए यह उपाय कारगार है |    

शिशु को स्तनपान कब तक कराएं:-

       शिशु को कम से कम 6 माह तक मां का दूध पिलाना चाहिए | यदि मां चाहे तो वह सरलता से 2 वर्ष तक अपना दूध पिला सकती है परंतु साथ में अन्य  ठोस आहार भी दें |

स्तनपान से माता को होने वाले लाभ:-

     सबसे पहले तो शिशु को दूध दुग्धपान कराने वाली मां को मानसिक संतुष्टि मिलती है, स्तन भी सुडौल व पुष्ट बने रहते हैं | कई सारे सर्वेक्षणों से पता चला है कि स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन कैंसर की संभावनाएं बहुत कम हो जाती हैं | स्तनपान कराने वाली मां अपने शिशु को कहीं भी कैसे भी अपना दुग्धपान करा सकती है | किसी सार्वजनिक स्थल की यात्रा के दौरान भी आप अपने कंधे पर साल या चादर ओढ़ कर बच्चे को अपना दूध दे सकती हैं | स्तनपान करवाने पर गर्भावस्था में संचित वसा पर प्राकृतिक रूप से नियंत्रण होता है जिससे माता शीघ्र ही आकर्षक व सुडौल लगने लगती है |नई माताओं के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव

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