November 13, 2018

छोटे बच्चों की मालिश कैसे करें, How to massage a new born baby

छोटे बच्चों की मालिश कैसे करें, How to massage a new born baby

             पहली बार बने माता-पिता के मन में हमेशा शंका रहती है कि वह अपने बच्चे की मालिश किस तरह से करें | तो आइए इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि आप अपने छोटे बच्चों की मालिश कैसे करें,How to massage a new born baby

           मां के कोमल हाथों का स्पर्श बच्चे को मसाज से ही मिलता है | वह मां के हाथों की भाषा पहचानता है |आंखों की भाषा पहचानता है उस पर प्रतिक्रिया करता है और खुद को सुरक्षित महसूस करता है | इस तरह छोटे बच्चों की मालिश आपके और आपके शिशु के बीच प्रेम बढ़ाने का नया तरीका है | शिशु विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता, दादा-दादी और नाना-नानी को शिशु की मसाज खुद अपने हाथों से करनी चाहिए | हमारे देश में प्राचीन काल से ही नहाने से पूर्व मां अपने शिशुओं की मालिश करती थी कुछ मां तो आज भी बच्चों की मालिश करती है |

         पहली बार बने माता-पिता के मन में शिशु की मालिश को लेकर कई प्रकार के सवाल होते हैं उनमें से कुछ सवालों के जवाब इस पोस्ट में नीचे देने की कोशिश की गई |

प्रश्न :मुझे अपने शिशु की मालिश कब करनी चाहिए ?

उत्तर: मालिश के लिए ऐसा समय चुनें जब आप और आपका शिशु रिलेक्स अवस्था में हो और आप हड़बड़ी में ना हो | शिशु के भूखे पेट या पेट भरे होने पर मालिश ना करें |दूध पिलाने के डेढ़ घंटे बाद मालिश करें |

प्रश्न : मुझे अपने शिशु की मालिश कितने अंतराल के बाद करनी चाहिए ?

उत्तर : शिशु की मालिश प्रतिदिन करनी चाहिए | बीमार होने अथवा टीका लगाने के बाद उससे 1 दिन पहले मालिश नहीं करें |

प्रश्न : मालिश कितनी देर तक करूं ?

उत्तर : नवजात शिशु के लिए 5 मिनट की मालिश सही रहती है 2 माह से बड़े शिशु 30 मिनट तक मालिश का आनंद ले सकते हैं |

प्रश्न : मालिश करने का स्थान कैसा हो ?

उत्तर : जमीन या बेड पर बैठकर शिशु की मसाज की जा सकती है ध्यान रहे कमरा हवादार और खुला ना हो | कमरे का तापमान 32 से 34 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए |

प्रश्न : कौन सा तेल उपयुक्त होता है ?

उत्तर :अपने शिशु की मालिश के लिए ऐसे तेल का प्रयोग करें जो क्लीनिकली प्रूफ ना हो | तेल शुद्ध व शिशु की कोमल त्वचा के अनुकूल हो |

प्रश्न : मालिश कब से व कितनी उम्र तक करनी चाहिए ?

उत्तर : शिशु की नेवल गिरने के बाद मालिश की शुरुआत करें जो सामान्यतः जन्म के 14 दिन बाद गिर जाती है | जब तक आप मालिश कर सकती हैं करें उम्र की कोई सीमा नहीं है |

वैज्ञानिक शोधों और शिशु रोग विशेषज्ञों से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि मालिश  शिशु के लिए बेहद आवश्यक और लाभदायक है |

शिशु को मालिश करने के लाभ-

  • शिशु के विकास में तेजी से वृद्धि होती है |
  • शिशु को अच्छी नींद आने में मदद मिलती है |
  • समय पूर्व हुए बच्चों का वजन बढ़ाने में सहायक है |

जब भी आप अपने शिशु की मालिश करें तो इन बातों का विशेष ध्यान दें-

  • मालिश करते समय आपके हाथ हल्के गर्म हैं हो |
  • अपने नाखून काट लें और अंगूठी आदि उतार लें | यह बच्चे की कोमल त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं |
  • आप खुद कोई सा भी गाना गुनगुनाए या म्यूजिकल बजाएं ताकि शिशु मालिश का आनंद उठा सके |
  • उसकी आंखों में आंखें डालकर बात करें |
  • बच्चे की सुविधा का पूरा ध्यान रखें |
  • धीरे-धीरे नरम हाथों से बच्चे की छाती पेट कंधे और गर्दन पर तेल लगाएं |
  • हल्का दबाव रखते हुए बच्चे के दोनों हाथ, पेट पर घुमावदार ढंग सेआड़े-तिरछे दाए-बाएं और नीचे के भागो पर हल्के और नरम हाथों से मालिश करें | हाथ को बार-बार घुमाएं |
  • हाथों और अंगुलियों को धीरे-धीरे खींचे, यदि बच्चा ऐसा करने दे तो |दोनों बाहों को हाथों में लेकर मुट्ठी भरे , पर दबाएं नहीं |उसके बाद कलाई और हथेलियों की मालिश करें |और अंगूठे को हल्का घुमाएं प्रत्येक उंगली को धीरे-धीरे खींचें |
  • अब टांगों और हाथों की मालिश करें | एक समय एक ही टांग पर मालिश करें | मांस को चुटकियों में लेकर फिर ढीला करें, ऐसा कई बार करें | उसके बाद जांघों की मालिश करें | उसके बाद एक टांग को हाथ का सहारा दें और थपथपाएं, जांघों से घुटने तक फिर घुटने से पांव तक |
  • अब हाथ को हटाकर पिंडली के पिछले भाग की मालिश हथेली से करें | प्रत्येक उंगली को धीरे-धीरे खींचें ऐसे ही बच्चे की दूसरी और के अंगो की मालिश करें |

यहां तक तो सामने वाले शरीर की मालिश की प्रक्रिया हुई है अब पीठ की और की मालिश ऐसे काम से शुरू करें |

  • बच्चे को पेट के बल लिटा दें, थोड़ा सा तेल लगाएं और आटा गूंथने की प्रक्रिया से बिना दबाव डालें थपथपाते हुए मालिश करें | कमर के दोनों और पीठ पर ऊपर नीचे सहलाते हुए मालिश करें |
  • कंधों, बाजुओं, गर्दन के पिछले भाग पर थपथपाते हुए मालिश करें |
  • रीड की हड्डी के ऊपर और उसके दोनों और भी मालिश करें, क्योंकि इससे नाड़ी तंत्र को बल मिलने से हड्डी लचीली और सुदृण बनती है | और बच्चे के मन को प्रसन्नता एवं शांति प्राप्त होती है |
  • नितंबों के मांस को हाथों में लेकर छोड़ें और ऐसा कई बार करें | अपने हाथों को घुमाये  ताकि खून का दौरा तेज हो जाए |
  • पहले गर्दन से पांव तक और फिर इसी प्रकार दूसरी ओर थपथपाएं |
  • अब दोनों हाथों से गर्दन और नीचे के भाग पर अंगूठे से मालिश करें और इसके बाद कंधों की उंगलियों और अंगूठों से मालिश करें |

ऊपर की क्रियाएं समाप्त होने पर बच्चे के शरीर पर गुदगुदाती उंगलियों से हाथों का संचालन करें ताकि बच्चे को ऐसा लगे कि उसके शरीर को किसी कोमल पंखुड़ी से स्पर्श किया जा रहा है | गुदगुदी से बच्चे बहुत हंसते और सुख का अनुभव करते हैं |

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