April 19, 2019

कैसे करें बढ़ते बच्चों की बेहतर परवरिश,Parenting Tips

बच्चों की बेहतर परवरिश for ghareluparamarsh

कैसे करें बढ़ते बच्चों की बेहतर परवरिश

हर कोई चाहता है कि उसकी संतान आगे चलकर एक अच्छा इंसान बने और जीवन में कामयाबियों की बुलंदी चूमे | इसके लिए जरूरी है कि वक्त रहते ही बच्चे की बेहतर परवरिश की ओर ध्यान दिया जाए |वैसे तो अलग-अलग बच्चों की परवरिश भी अलग-अलग तरीके से ही हो सकती है, क्योंकि हर बच्चे का मानसिक और शारीरिक स्तर एक जैसा नहीं होता | फिर भी आगे कुछ ऐसे टिप्स दिए जा रहे हैं, जिस पर अमल करके आप अपनी संतान को बेहतर रास्ता दिखा सकते हैं |

बच्चों की परवरिश के टिप्स – जो बच्चों के पालन-पोषण में माता-पिता के बहुत काम आ सकते हैं। चाहे आप मां हों, पिता हों या आप माता-पिता बनने वाले हों, ये परामर्श आपके बहुत काम आ सकते हैं। — माता-पिता बनना एक विचित्र अनुभव है। आप कुछ ऐसा करने की कोशिश करते हैं जो आज तक कोई नहीं जान पाया कि उसे अच्छी तरह कैसे किया जाए। चाहे आपके बारह बच्चे हों, तब भी आप सीख ही रहे होते हैं। हो सकता है कि आपने ग्यारह बच्चे अच्छी तरह पाले हों, मगर बारहवें में आपको परेशानी हो सकती है।

 

  • आपका बच्चा जो बनना चाहे, उसे वही बनने दें. बच्चे पर अपनी मर्जी कभी न थोपें. जीवन के प्रति आपका जो नजरिया है, उससे अपनी संतान को प्रभावित करने की न सोचें. आपके बच्चे को ठीक वही करने की जरूरत नहीं है, जो आपने अपने जीवन में किया. हो सकता है कि आपका बच्चा अपनी रुचि और समझ से चलकर जीवन में उस जगह तक चला जाए, जिसकी आपने कल्पना तक न की हो |

 

  • घर-आंगन में संतान आने पर ज्यादातर लोग समझते हैं कि अब उनके लिए पढ़ाने का वक्त आ गया है, जबकि स्थ‍िति दूसरी होती है | यही अभ‍िभावकों के लिए भी सीखने का वक्त होता है. एक छोटा बच्चा जीवन के प्रति ज्यादा सकारात्मक नजरिया रखता है. यही वजह है कि वह ज्यादा खुश रहता है. इसलिए उससे सीखने की कोश‍िश करें |

 

  • बच्चा स्वाभाविक तौर पर अध्यात्म के निकट होता है | उसे जीवन में अध्यात्म‍ और धर्म के प्रति सोच-समझ खुद विकसित करने दें. उस पर अपने पूर्वाग्रह न लादें 

 

  • आम तौर पर बच्चा कई तरह के लोगों और चीजों के संपर्क में आता है. इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी जैसी चीजें भी होती है. वह पास-पड़ोस के दोस्तों, स्कूल में टीचर और अन्य लोगों से प्रभावित होता है. अगर आप का नजरिया खुशनुमा होता है, व्यवहार बेहतर होता है, आप समझदार हैं, तो बच्चा सब कुछ छोड़कर आपके पास ही आएगा. आपको ही आदर्श मानेगा |

 

  • हमेशा खुश रहने की कोश‍िश करें. जब आप खुश होंगे, तो आपके बच्चे का नजरिया भी पॉजिटिव होगा. अगर आप चिंता, तनाव, भय, दुख, ईर्ष्या आदि के भाव से भरे होंगे, तो इससे बच्चे पर बुरा असर पड़ेगा. इस बात का ध्यान रखें कि अगर आपका दिल प्रेम व करुणा से भरा होगा, तो आपका बच्चा भी बेहतर इंसान बन सकेगा |

 

  • सभी बच्चों पर एक ही नियम लागू नहीं होता। हर बच्चा अलग होता है। यह एक खास विवेक है। इस बारे में कोई सटीक रेखा नहीं खींची जा सकती कि कितना करना है और कितना नहीं करना है। अलग-अलग बच्चों को ध्यान, प्यार और सख्ती के अलग-अलग पैमानों की जरूरत पड़ सकती है। अगर मैं नारियल के बाग में खड़ा हूं और आप आकर मुझसे पूछें कि ‘हर पौधे में कितना पानी देना है,’ तो मैं कहूंगा, ‘कम से कम पचास लीटर।’ लेकिन अगर आप घर जाकर अपने गुलाब के पौधे में 50 लीटर पानी डाल दें, तो वह मर जाएगा। इसलिए आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपके घर में किस तरह का पौधा है।

 

  • बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि जैसे ही बच्चा पैदा होता है, शिक्षक बनने का समय शुरू हो जाता है। जब एक बच्चा आपके घर में आता है, तो यह शिक्षक बनने का नहीं, सीखने का समय होता है क्योंकि अगर आप अपनी और अपने बच्चे की ओर देखें, तो आपका बच्चा ज्यादा खुश होता है, है न? इसलिए यह उनसे जीवन के बारे में सीखने का समय है, सिखाने का नहीं। आप बच्चे को बस एक चीज सिखा सकते हैं – जो आपको कुछ हद तक सिखाना पड़ता है – कि दुनिया में किस तरह जीवन यापन से जुड़े काम करें। मगर जब खुद जीवन की बात आती है, तो एक बच्चा अपने अनुभवों से जीवन के बारे में ज्यादा जानता है। वह जीवन है, वह जीवन को जानता है। आपके साथ भी ऐसा होता है, कि अगर आप अपने मन पर थोपे गए प्रभावों को दूर कर दें, तो आपकी जीवन ऊर्जा जानती है कि कैसे रहना है। यह आपका मन है जो नहीं जानता कि कैसे रहना है। एक वयस्क हर तरह का कष्ट खुद पर ओढ़ने में माहिर होता है, ये सब कष्ट उसके मन में होते हैं। बच्चा अब तक उस स्थिति तक नहीं पहुंचा है। इसलिए यह सीखने का समय है, सिखाने का नहीं।

 

  • अगर माता-पिता अपने बच्चों की वाकई परवाह करते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों को इस तरह पालना चाहिए कि बच्चे को माता-पिता की कभी जरूरत न हो। प्यार की प्रक्रिया हमेशा आजाद करने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए, उलझाने वाली नहीं। इसलिए जब बच्चा पैदा होता है, तो बच्चे को चारों ओर देखने-परखने, प्रकृति के साथ और खुद अपने साथ समय बिताने दें। प्यार और सहयोग का माहौल बनाएं।

 

  • अगर हम वाकई अपने बच्चे को अच्छी तरह पालना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए कि क्या हम खुद को रूपांतरित कर सकते हैं। जो भी माता-पिता बनना चाहते हैं, उन्हें एक साधारण सा प्रयोग करना चाहिए। उन्हें बैठकर देखना चाहिए कि उनके जीवन में क्या ठीक नहीं है और उनकी जिंदगी के लिए क्या अच्छा होगा। बाहरी दुनिया के लिए नहीं, बल्कि खुद उनके लिए। अगर आप अपने बारे में – अपना व्यवहार, बातचीत, रवैया और आदतें – तीन महीने में बदल सकते हैं, तो आप अपने बच्चे को भी समझदारी से संभाल सकते हैं।

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